Wednesday, May 13, 2009

दिन में सपने देखना ... अच्छी बात है



ऑफिस में काम करने के बजाय इधर-उधर की बातों में सिर खपाने को बुरी बात माना जाता है। दिन में सपने देखना इतना बुरा भी नहीं है और इससे मस्तिष्क को जीवन की जटिल समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलती है। एक नए अध्ययन से यह तथ्य सामने आया है। दिमाग की आवारागर्दी को आमतौर पर नकारात्मक चीजों जैसे आलस्य या असावधानी से जोड़ा जाता है। परंतु अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि जागते हुए सपने देखने के समय दिमाग बहुत सक्रिय रहता है। किसी सामान्य कार्य को करने के दौरान जितना मस्तिष्क सक्रिय रहता है, उससे दिमाग की गति काफी अधिक रहती है।

लेकिन फिर भी लोग काम करते-करते दूर ख्यालों में खो जाते हैं। यूं दूर ख्यालों में खोना यानी दिन में ही सपने देखना बुरी बात नहीं है। साइंटिस्ट के मुताबिक इस तरह दिन में ही ऊटपटांग सपने देखना इंसान की रचनात्मकता में इजाफा करता है।


रिसर्च बताती है कि दिन में सपने देखने के दौरान दिमाग कई ऐसी बातों और संबंधों के बारे में सोचता है, जिन पर सामान्य परिस्थितियों में ध्यान नहीं जाता। इस दौरान इंसान का ध्यान अपने आसपास के हालात से परे जाकर अजीबोगरीब चीजों पर लगता है। ऐसे में उन चीजों की भी कल्पना कर ली जाती है, जो वास्तव में होती भी नहीं हैं।


दिन में सपने देखने के लिए खाली टाइम और उससे पैदा होने वाली बेचैनी खासी जरूरी है। कई बार कल्पना के घोड़े खुली आंखों से दौड़ाने पर न सिर्फ वक्त कट जाता है, बल्कि इसमें खासा मजा भी आता है। मगर दिन में सपने देखना यूं ही नहीं आ जाता, इसके लिए भी अभ्यास की जरूरत पड़ती है। दिन में सपने देखने के लिए बहुत आराम से सोचने की जरूरत है बिना किसी पूर्व निर्धारित शर्त या दबाव के। ऐसे ख्यालों को खास तौर पर आजादी देनी होती है, जो पहली नजर में बकवास लगते हैं।


दिन में सपने देखने से लोगों में खुद को फ्यूचर में प्रोजेक्ट करने और उसकी तमाम संभावनाओं पर प्रतिक्रिया जताने की क्षमता बढ़ जाती है। जब आप जागते हुए सपने देखते हैं तो आप अपने तात्कालिक लक्ष्य जैसे किताब पढ़ना या कक्षा में ध्यान देने को हासिल नहीं कर रहे होते लेकिन आपका दिमाग इस समय आपके जीवन के अधिक महत्वपूर्ण प्रश्नों जैसे करियर को आगे बढ़ाने या व्यक्तिगत संबंधों के बारे में सोच रहा होता है। सामान्य कामों में लगे रहने की बजाए दिमाग को खुला छोड़ देने से वह जटिल समस्याओं को अधिक सफलतापूर्वक सुलझा सकता है। उसके बिना हम बेहद सीमित सोच के इंसान बनकर रह जाएंगे। तो अगली बार जब दिन में ख्यालों की भूलभुलैया में भटकें, तो कोई गिला नहीं रहे क्योंकि इससे दिमाग तेज होता है।

स्रोत- विभिन्न साइटें

2 comments:

महामंत्री - तस्लीम said...

बहुत ही अच्छा प्रयास है आपका। बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

anil said...

अच्छा प्रयास सुन्दर लेखन बहुत बहुत शुभकामनाएँ .